4 अग॰ 2023

ड्रिप सिंचाई

 

ड्रिप सिंचाई बूंद-बूंद या छोटी नलिकाओं के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाने की एक कुशल और पानी बचाने वाली विधि है। पौधों को नियंत्रित और सटीक सिंचाई प्रदान करने के लिए कृषि, भू-दृश्य और बागवानी में इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है और फसल की पैदावार में सुधार होता है।

एक सामान्य ड्रिप सिंचाई प्रणाली में, पानी की आपूर्ति पाइप और ट्यूबिंग के नेटवर्क के माध्यम से जल स्रोत (जैसे, एक कुआं, जलाशय, या पानी की टंकी) से की जाती है। एमिटर या ड्रिपर्स, जो पौधे के जड़ क्षेत्र के पास रखे जाते हैं, धीमी और स्थिर दर से पानी छोड़ते हैं। यह लक्षित सिंचाई वाष्पीकरण को कम करती है और पानी के बहाव को कम करती है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल सिंचाई विधि बन जाती है।

ड्रिप सिंचाई के लाभ:

जल दक्षता: स्प्रिंकलर या बाढ़ सिंचाई जैसी पारंपरिक सिंचाई विधियों की तुलना में ड्रिप सिंचाई से पानी की खपत काफी कम हो जाती है। यह पौधों को सीधे पानी पहुंचाता है, जिससे न्यूनतम बर्बादी सुनिश्चित होती है।

बेहतर फसल स्वास्थ्य: ड्रिप सिंचाई यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक पौधे को आवश्यक मात्रा में पानी मिले, जिससे कम या अधिक पानी देने का जोखिम कम हो जाता है, जिससे स्वस्थ और अधिक उत्पादक फसलें पैदा हो सकती हैं।

खरपतवार नियंत्रण: चूंकि पानी सीधे पौधे की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, इसलिए मिट्टी की सतह पर नमी कम होती है। इससे खरपतवार की वृद्धि कम हो जाती है, क्योंकि खरपतवार नम स्थितियों में पनपते हैं।

मृदा क्षरण को कम करना: ड्रिप सिंचाई से मृदा क्षरण को रोकने में मदद मिलती है, क्योंकि पानी धीमी और नियंत्रित दर से लगाया जाता है, जिससे अपवाह और मिट्टी के विस्थापन को रोका जा सकता है।

अनुकूलन योग्य और स्केलेबल: ड्रिप सिंचाई प्रणाली को विभिन्न फसलों और परिदृश्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित किया जा सकता है। इन्हें आसानी से विस्तारित या संशोधित भी किया जा सकता है।

ऊर्जा की बचत: ड्रिप सिंचाई के लिए अन्य सिंचाई विधियों की तुलना में कम पानी के दबाव की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप पानी पंप करने के लिए ऊर्जा की बचत होती है।

किसी विशेष क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई प्रणाली के बारे में विशेष जानकारी के लिए, मैं उस क्षेत्र के स्थानीय कृषि अधिकारियों, सिंचाई विशेषज्ञों या किसानों से संपर्क करने की सलाह देता हूं। उन्हें क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई पद्धतियों को अपनाने, कार्यान्वयन और सफलता के बारे में नवीनतम जानकारी होगी।

ECHO- एक गूँज

ई-कचरे की मात्रा

 भाग 4......

किसी भी देश में ई-कचरे की मात्रा जरूरी नहीं है कि उस देश में उत्पादित ई-कचरे की मात्रा ही हो, क्योंकि इसमें देश के बाहर से आने वाला कचरा भी मिलाया जाता है। अमेरिका जैसे कई देश अपना ई-कचरा विकासशील देशों में निपटान के लिए भेजते हैं। ई-कचरे के निपटान के मामले में भारत, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया जैसे देश शीर्ष पर हैं। भारत में हर साल 50 हजार मीट्रिक टन ई-कचरा अवैध रूप से आता है। दरअसल, यह आंकड़ा काफी ज्यादा होने की संभावना है. यदि निर्णय लिया जाए तो इस ई-कचरे से कई उपकरणों की मरम्मत कर उन्हें पुन: उपयोग योग्य बनाया जा सकता है।

ECHO Foundation

भाग्यश्री चेंबूरकर,

अपशिष्ट प्रबंधन और खाद विशेषज्ञ,

9870035189

3 अग॰ 2023

ई-कचरे में भारी वृद्धि

 

भाग 3

यह भारत के ई-कचरे का 22-23 गुना है। भारत में 2016 में यह आंकड़ा 16.5 मिलियन टन था. 2010 में यह बढ़कर 2 मिलियन टन हो गया। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह अब तक लगभग 30-40 टन तक पहुंच जाएगा। मोबाइल फोन खरीद के मामले में भारत दुनिया में 5वें स्थान पर है।

2001 में भारत में मोबाइल फ़ोन धारकों की संख्या 31 करोड़ थी। एक अवलोकन के मुताबिक 2019 तक यही संख्या बढ़कर साढ़े 81 करोड़ हो गई. अकेले 2018 में 32-36 करोड़ मोबाइल फोन बिके। हम ई-कचरे में भारी वृद्धि देख रहे हैं क्योंकि उपयोग के बाद उपकरणों को फेंक दिया जाता है।

ई-कचरे का निपटान कैसे किया जाए यह वास्तव में आज एक प्रश्न है। इस कचरे का निपटान करना नहीं बल्कि इसका सही तरीके से निपटान कैसे किया जाए इसका उत्तर ढूंढना बहुत महत्वपूर्ण है। हमें ई-कचरे के निपटान से पैदा होने वाले खतरे का अंदाज़ा नहीं है.

ECHO Foundation

भाग्यश्री चेंबूरकर,

अपशिष्ट प्रबंधन और खाद विशेषज्ञ,

9870035189

2 अग॰ 2023

खनिजों के संरक्षण

 

खनिजों के संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता के बारे में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठा है, विशेष रूप से भारत में एथिलीन के महत्वपूर्ण भंडार की खोज के आलोक में। एथिलीन एक मूल्यवान संसाधन है जिसका उपयोग बैटरी उत्पादन सहित विभिन्न उद्योगों में किया जाता है। हालाँकि, किसी भी अन्य सामग्री की तरह, बैटरी जैसे एथिलीन से बने उत्पादों का अंतिम जीवन अपशिष्ट प्रबंधन एक गंभीर चिंता का विषय है।

जब बैटरी या एथिलीन युक्त किसी अन्य उत्पाद से निकलने वाले कचरे की बात आती है, तो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और मूल्यवान संसाधनों के संरक्षण के लिए उचित निपटान और पुनर्चक्रण आवश्यक है। एथिलीन-आधारित बैटरियों से अपशिष्ट प्रबंधन के लिए यहां कुछ विचार दिए गए हैं:

बैटरी पुनर्चक्रण: खर्च की गई बैटरियों से एथिलीन सहित मूल्यवान सामग्रियों को पुनर्प्राप्त करने के लिए प्रभावी बैटरी पुनर्चक्रण प्रक्रियाओं का विकास करना महत्वपूर्ण है। पुनर्चक्रण द्वारा, हम पृथ्वी से नए एथिलीन को निकालने की आवश्यकता को कम कर सकते हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सकेगा।

पर्यावरण संबंधी नियम: सरकारों और पर्यावरण एजेंसियों को बैटरी और एथिलीन युक्त अन्य उत्पादों के उचित निपटान और पुनर्चक्रण के लिए सख्त नियम स्थापित करने चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियां और उपभोक्ता जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जवाबदेह हैं।

शिक्षा और जागरूकता: पुनर्चक्रण और उचित अपशिष्ट निपटान के महत्व के बारे में जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। अनुचित अपशिष्ट प्रबंधन के संभावित पर्यावरणीय खतरों के बारे में लोगों को शिक्षित करना जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित कर सकता है।

अनुसंधान और नवाचार: बैटरी प्रौद्योगिकियों में निरंतर अनुसंधान और विकास से पारंपरिक एथिलीन-आधारित बैटरियों के अधिक टिकाऊ विकल्प सामने आ सकते हैं। नई सामग्री और डिज़ाइन पर्यावरणीय प्रभाव को कम कर सकते हैं और पुनर्चक्रण क्षमता में सुधार कर सकते हैं।

विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी (ईपीआर): विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी कार्यक्रमों को लागू करने से निर्माताओं को उनके उत्पादों के पूरे जीवनचक्र के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है, जिसमें उनके अंतिम जीवन अपशिष्ट प्रबंधन भी शामिल है। यह दृष्टिकोण उत्पादकों को रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट प्रबंधन को ध्यान में रखकर उत्पाद डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

सहयोगात्मक प्रयास: सरकारों, उद्योगों, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग कुशल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली बनाने में मदद कर सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि रीसाइक्लिंग सुविधाएं सुलभ और पर्याप्त रूप से सुसज्जित हैं।

सर्कुलर इकोनॉमी दृष्टिकोण: एक सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को अपनाने से उत्पादों को उनके जीवन के अंत में आसानी से पुनर्नवीनीकरण या पुन: उपयोग करने के लिए डिजाइन करके अपशिष्ट को कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे लैंडफिलिंग या भस्मीकरण की आवश्यकता कम हो जाती है।

एथिलीन-आधारित बैटरियों से अपशिष्ट प्रबंधन एक सतत चुनौती है, लेकिन इन रणनीतियों को लागू करके और संसाधन प्रबंधन के लिए एक स्थायी दृष्टिकोण अपनाकर, हम अपशिष्ट को कम कर सकते हैं, मूल्यवान खनिजों का संरक्षण कर सकते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।

ई-कचरा


 भाग 2

वहीं, पिछले 30 वर्षों में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार की तीव्र वृद्धि से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। जैसे ही ये उत्पाद अप्रचलित हो जाते हैं या बंद हो जाते हैं या बाजार में नए मॉडल पेश किए जाते हैं, इन अपशिष्ट उपकरणों को कचरे के रूप में फेंक दिया जाता है और ई-कचरा उत्पन्न होता है। पिछले 30 वर्षों में यह ई-कचरा तेजी से बढ़ रहा है और कचरे की वृद्धि दर लगभग 8% प्रति वर्ष है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के मुताबिक, हम हर दिन 4 लाख 16 हजार फोन और 1 लाख 42 हजार कंप्यूटर इस्तेमाल में न होने के कारण फेंक देते हैं। 2005 में अकेले यूरोप में 83 लाख से 91 लाख टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ था।

ECHO Foundation

भाग्यश्री चेंबूरकर,

कचरे का प्रबंधन और खाद विशेषज्ञ,

9870035189.

1 अग॰ 2023

ई-कचरा

 

भाग ---- पहला

नमस्कार श्रोताओं.

भारत में आज़ादी के बाद 1 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों का भारी विकास हुआ। 2022 की जनगणना के अनुसार, मुंबई की जनसंख्या 24,433,357 यानी 2.4 करोड़ है। शहर में बढ़ती आबादी के कारण कचरे की समस्या भी बढ़ती जा रही है और तो और आज दुनिया भर में ई-कचरा भी बढ़ता जा रहा है। अब वास्तव में ई वेस्ट क्या है...??

सामान्य तौर पर, ई-कचरा बिजली के उपकरणों के कचरे को संदर्भित करता है। उदाहरण के लिए, मोबाइल फोन, आई-पैड, आई-पैड, लैपटॉप, कंप्यूटर, सर्वर, टेलीकॉम उपकरण, टीवी, कैलकुलेटर, ऑडियो/वीडियो उपकरण, स्कैनर, प्रिंटर, एयर कंडीशनर, ओवन, वॉशिंग मशीन, मिक्सर, रेफ्रिजरेटर, कार्ट्रिज, मदरबोर्ड, अलार्म सायरन, सेंसर, सीडी प्लेयर, सीडी, सुरक्षा उपकरण, अनगिनत चीजें बिजली से चलती हैं।

सूचना संकलन

ECHO Foundation 

भाग्यश्री चेंबूरकर,

अपशिष्ट प्रबंधन और खाद विशेषज्ञ,

9870035189

सूखा और गीला कचरा अलग करने की पहल:

सूखा और गीला कचरा अलग करने की पहल : सफाई और पर्यावरण बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम तारीख : 19 जुलाई , 2026 गुजरात के वल...