24 फ़र॰ 2023

महोगनी

 

महोगनी की खेती: ये हैं महोगनी की उन्नत किस्में, जिनकी खेती किसानों को दे सकती है बढ़िया आमदनी

भारत में कई किसान महोगनी की खेती से जुड़े हैं। महोगनी के पेड़ की लम्बाई 40 से 200 फीट तक हो सकती है। लेकिन भारत में असली औसत लम्बाई 60 फीट के आसपास रहती है। भारत में महोगनी की पांच किस्मों की खेती की जाती है।

महोगनी की खेती (Mahogany Farming) | महोगनी का पेड़, कीमती पेड़ों में गिना जाता है। इसका लगभग हर भाग इस्तेमाल में लाया जाता है। इसलिए इसे किसानों के लिए लंबे समय के लिए आमदनी देने का ज़रिया भी कहा जाता है। इसकी लकड़ी का इस्तेमाल जहाज़, फ़र्नीचर, प्लाईवुड, सजावट की चीजें और मूर्तियों को बनाने में किया जाता है। जबकि इसके बीज, पत्तों और फूलों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयों में होता है। मुख्य रूप से महोगनी की कोई प्रजाति भारत में नहीं पाई जाती। देश में इसकी कई विदेशी किस्मों की खेती होती है। महोगनी के पेड़ की लम्बाई 40 से 200 फ़ीट तक हो सकती है। लेकिन भारत में असली औसत लम्बाई 60 फ़ीट के आसपास रहती है। एक एकड़ में महोगनी के 1200 से 1500 पेड़ उगाये जा सकते हैं।

महोगनी की हैं कौन-कौन सी किस्में?

भारत में अभी महोगनी की पांच किस्मों की खेती की जाती है। महोगनी के इन पांच किस्मों के नाम क्यूबन, मैक्सिकन, अफ़्रीकन, न्यूज़ीलैंड और होन्डूरन है। विदेशी कलमी के ज़रिये इन किस्मों की खेती होती है।

होन्डूरन और क्यूबन को सबसे बेहतरीन किस्मों में शुमार किया जाता है। ये किस्में व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली महोगनी की उन्नत प्रजातियां हैं। इन किस्मों की लकड़ियां बहुत ही अच्छी मानी जाती है, जिनपर पानी का असर नहीं होता, यानी पानी लगने पर भी इन्हें नुकसान नहीं पहुंचता।

मैक्सिकन किस्म की प्रजाति के पेड़ क्यूबन और होन्डूरन की तुलना में थोड़े छोटे होते हैं, लेकिन इनकी लकड़ियों की क्वालिटी भी काफ़ी अच्छी मानी जाती है।

यू.एस. में बेचे जाने वाले अधिकांश महोगनी आइटम अफ़्रीकी महोगनी पेड़ से बनाए जाते हैं। ये दिखने में अन्य महोगनी के पेड़ की तरह ही दिखता है।

न्यूज़ीलैंड किस्म के परिपक्व पेड़ 15 मीटर तक की ऊंचाई तक बढ़ते हैं। इसकी लकड़ी का इस्तेमाल ज़्यादतर नांव बनाने में किया जाता है। इसकी लकड़ी से सजावटी चीजें बनाई जाती हैं। ये अन्य किस्मों की तुलना में हल्की होती हैं। इसकी पत्तियां 40 मिलीमीटर तक बड़ी और चमकदार होती है।

सभी किस्मों के पौधों को उपज और बीजों की गुणवत्ता के आधार पर तैयार किया जाता है। महोगनी के पौधों की उचित देखभाल के लिए किसान को मेहनत करनी पड़ती है। इसीलिए सरकारी रजिस्टर्ड कम्पनी या नर्सरी से दो-तीन साल पुराने और अच्छे ढंग से विकासित हो रहे पौधों को अपनाना ज़्यादा फ़ायदेमन्द रहता है। ज़ाहिर है, महोगनी उन लोगों को लिए भी फ़ायदे का सौदा है जो नर्सरी चलाते हैं। इसकी नर्सरी खोलकर अच्छी खासी आमदनी की जा सकती है। इसका एक पौधा 30 रुपये से लेकर 200 रुपये तक बिक जाता है।

18 फ़र॰ 2023

गोइंग ग्रीन टिप्स

 हर जगह, हर किसी ने गोइंग ग्रीन टिप्स सीखना शुरू कर दिया है। कई गो ग्रीन मूवमेंट हैं और यह हमारा कर्तव्य है कि हम इसमें भाग लें और जितना हो सके ग्रीन हो जाएं। यहां कुछ ग्रीन टिप्स दिए जा रहे हैं जो हमारी जीवन शैली में बदलाव लाएंगे और कुछ पैसे बचाएंगे।

घर में ग्रीन जाना

1. जब जरूरत न हो तो बहते नल के पानी को बंद कर दें।

2. बर्तन भर जाने पर डिशवॉशर का उपयोग करें। इसे अधिक बार उपयोग करने से बचने का प्रयास करें, अर्थात प्रत्येक प्लेट के लिए।

3. पानी के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की कोशिश करें। उपयोग न होने पर नल बंद कर दें। इस तरह, यह अनुमान लगाया गया है कि हर घर एक गैलन से अधिक पानी बचा सकता है, जो कि एक स्थानीय में संयुक्त होने पर बहुत अधिक है।

4. लाइट बंद करना और जितना हो सके बिजली बचाना भी पर्यावरण को बचाने का एक तरीका है। दिन के दौरान, सूरज की रोशनी को अंदर आने देने और घर को गर्माहट से भरने के लिए खिड़कियां और स्क्रीन खोलना अच्छा होता है। आखिर सूरज की रोशनी शरीर के लिए विटामिन ए के रूप में जरूरी है।

5. स्थानीय बिजली कंपनी घर को एक बेहतर ऊर्जा कुशल घर कैसे बनाया जाए, इस पर एक मुफ्त प्रस्तुति दे सकेगी।

पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के साथ ग्रीन जाना

1. नि:शुल्क सेवा संगठनों को अवांछित या अनुपयोगी सामग्री देना हरित होने का एक बेहतर तरीका है।

2. फर्नीचर का पुन: उपयोग करने से नए फर्नीचर पर खर्च होने वाले कुछ अतिरिक्त पैसे बचेंगे। उदाहरण के लिए, कोई लकड़ी की चादरें जोड़कर एक मेज को फिर से तैयार कर सकता है और अपनी खुद की अलमारी बना सकता है।

3. स्थानीय कचरा संग्रहण सेवा का उपयोग करके कागज, प्लास्टिक, कांच और धातुओं का पुनर्चक्रण भी किया जा सकता है।

4. कोई भी व्यक्ति पुरानी वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनमें से सार बनाने में अपनी रचनात्मकता का उपयोग कर सकता है। उदाहरण के लिए, पुराने पर्दे के कपड़े को सपाट चादरों से सिला जा सकता है और पर्दे या कपड़े के टुकड़े के रूप में बनाया जा सकता है जो दीपक के रंगों को कवर करता है। वे आंतरिक सज्जा सामग्री के मामले में आसान और सस्ते हैं।

5. हर महीने प्लास्टिक की बोतलों की तुलना में पुन: प्रयोज्य पानी की बोतलों का चयन करना प्लास्टिक के उपयोग से बचने और पानी की बोतलों का पुन: उपयोग करने का एक अच्छा तरीका है। वे शुरुआत में महंगे हो सकते हैं, लेकिन एक बार इसकी आदत पड़ने पर, वे हरे होने के अलावा स्वास्थ्य और स्वच्छता प्रदान करने के योग्य साबित होंगे।

परिवहन के साथ ग्रीन जाना

1. कारपूलिंग या वाहन पूलिंग पर्यावरण को तीन या चार गुना प्रदूषण से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। कारपूलिंग उन दोस्तों, पड़ोसियों या रिश्तेदारों के साथ की जा सकती है जो आपकी दिशा में काम कर रहे हैं, जरूरी नहीं कि एक ही कंपनी हो।

2. वाहन का नियमित रखरखाव और सर्विस स्टेशन के पास सर्विस के लिए उपलब्ध कराने से इसके प्रदूषण उत्पादन को कम करने में मदद मिलेगी।

3. कई कंपनियों ने 'घर पर रहते हुए काम करो' का प्लान पेश करना शुरू कर दिया है। इस लाभ का आनंद लेने से न केवल हरियाली की बचत होती है, बल्कि परिवार में एक साथ अच्छा समय बिताने और यात्रा और ईंधन की लागत बचाने में भी मदद मिलती है।

ये कुछ गोइंग ग्रीन टिप्स हैं। उनका पालन करने से स्वस्थ और समृद्ध जीवन मिलेगा।



10 जन॰ 2023

मियावाकी जंगल

 

क्या होते हैं मियावाकी जंगल 

मियावाकी जंगल एक ख़ास तरह का जंगल होता है जिसकी खोज जापान के बॉटेनिस्ट अकीरा मियावाकी ने की थी . इस जंगल को विशेष तरीके से उगाया जाता है ताकि इन्हें लंबे समय तक हरा-भरा रखा जा सके . मियावाकी जंगल की खासियत है की यह कम समय में अधिक हरियाली फ़ैलाते हैं और साथ ही इनसे निकलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा भी अधिक होती है. मियावाकी जंगल की तकनीक से केवल 2-3 वर्षों में ही एक घना जंगल प्राप्त किया जा सकता है जबकि सामान्य तौर पर एक घना जंगल तैयार करने के लिए 20-30 साल का समय लगता है. 

बॉटेनिस्ट अकीरा मियावाकी का मानना था की चर्च व मन्दिर जैसे धार्मिक स्थानों पर कभी भी पेड़-पौधे खत्म नहीं होते बल्कि यह खुद ही प्राकृतिक रूप से यहाँ उग जाते है और दशकों तक ऐसे ही बने रहते हैं. पेड़ों की इसी खूबी को उन्होंने मियावाकी जंगल का आधार माना है 

मियावाकी जंगल तकनीक के नियम 

(1) ज़मीन की उर्वरता बढ़ाएं 

जिस ज़मीन पर मियावाकी जंगल विकसित किया जाना हो उस ज़मीन की उर्वरता बढ़ा लेनी चाहिए जिसके लिए उस ज़मीन की मिट्टी में भूसा,गोबर ,नारियल के छिलके और खाद इत्यादि डाली जा सकती है. 

(2) वातावरण के अनुकूल पौधे लगाएं 

मियावाकी जंगल के लिये अनिवार्य है कि जिस जगह को पौधे लगाने के लिए चुना गया हो वहां के वातावरण के अनुकूल ही पौधे लगाये जाएं जिससे यह जल्दी हरे-भरे हो जाएँगे.  

(3) बीजों का चयन 

मियावाकी जंगल के लिए अनिवार्य है की जिस ज़मीन पर पौधे उगाये जाएंगे उसके लिए बीज भी उसी ज़मीन पर उगे हुए पौधे से लिया गया हो अर्थात् बीज की मूल प्रजाति उसी मिट्टी की हो. 

(4) इर्द-गिर्द घास और पत्तियाँ डाले 

अक्सर तेज़ धूप में मिट्टी अपनी उर्वरता और नमी खो देती है इसलिए ज़रूरी है की पौधे लगाने के बाद उसके इर्द-गिर्द घास और पत्तियाँ दाल देनी चाहिए क्योंकि तेज़ धूप के समय में यह एक लेयर की तरह का काम करता है और मिट्टी की नमी को खत्म नहीं होने देता. 

(5)मानसून का समय है बेहतर 

मियावाकी तकनीक से उगाये जाने वाले पौधों के लिए सबसे उत्तम समय मानसून का होता है क्योंकि बारिश के पानी में यह पौधे आसानी से अपनी जड़ें विकसित कर लेते हैं और फिर इन्हें अधिक देखभाल की भी आवश्यकता नहीं पड़ती. 

 


सूखा और गीला कचरा अलग करने की पहल:

सूखा और गीला कचरा अलग करने की पहल : सफाई और पर्यावरण बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम तारीख : 19 जुलाई , 2026 गुजरात के वल...