अपने पर्यावरण और उसके परिवेश के प्रति सचेत रहना हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। तेजी से औद्योगीकरण और आधुनिकीकरण के साथ, हम अपने जीवन को नियंत्रित करने के लिए मशीनों पर अधिक निर्भर हो गए हैं। प्रौद्योगिकी ने प्लास्टिक, बैटरी आदि जैसे कृत्रिम पदार्थों के उत्पादन को बढ़ावा दिया है, जो जरूरी नहीं कि पर्यावरण के अनुकूल हों। इन पदार्थों को नष्ट होने और जहरीली गैसों और रसायनों को पर्यावरण में छोड़ने में हजारों साल लग जाते हैं, जो मनुष्यों, जीवों और वनस्पतियों को प्रभावित करते हैं।
पर्यावरण के मुद्दे-गत सौ वर्ष में मनुष्य की जनसंख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसके कारण अन्न, जल, घर, बिजली, सड़क, वाहन और अन्य वस्तुओं की माँग में भी वृद्धि हुई है परिणामस्वरूप हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर काफी दबाव पड़ रहा है और वायु, जल तथा भूमि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हमारी आज भी आवश्यकता है कि विकास की प्रक्रिया को बिना रोके अपने महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को खराब होने और इनको अवक्षय को रोकें और इसे प्रदूषित होने से बचाएँ। By: ECHO Foundation
4 जुल॰ 2023
प्रौद्योगिकी पर्यावरण की कैसे मदद कर सकती है?
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
-
भविष्य में , भारत पानी की भारी कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित होगा पानी की कमी का सामना करने वाले 80 प्रतिशत लोग एशिया ...
-
पर्यावरण क्या है ? इस मे कया है क्या हम पर्यावरण के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। इसके शुद्धिकरण के बारे में तो लगभग ...
-
महाराष्ट्र के देवगढ़ के अचरा गांव में मैंग्रोव संरक्षण महाराष्ट्र के देवगढ़ में स्थित अचरा गांव एक शांत तटीय गांव है जो अपनी समृद्ध जैव वि...
-
बंजर भूमि से रोजगार प्राप्त कर लोगों का कल्याण किया जा सकता है - प्रबंधन - धवल मेहता - हमारे राष्ट्रीय राजमार्गों , राष...
-
हर साल 16 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व ओजोन दिवस एक महत्वपूर्ण वैश्विक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य पृथ्वी की ओजोन परत की सुरक्षा के महत...
-
महोगनी की खेती : ये हैं महोगनी की उन्नत किस्में , जिनकी खेती किसानों को दे सकती है बढ़िया आमदनी भारत में कई किसान महोगनी...
-
क्या होते हैं मियावाकी जंगल मियावाकी जंगल एक ख़ास तरह का जंगल होता है जिसकी खोज जापान के बॉटेनिस्ट अकीरा मियावाकी ...
-
पृथ्वी पर, जिस स्थान पर हम रहते हैं, पानी कुल क्षेत्रफल का 70% कवर करता है और इसमें अंतर्देशीय समुद्र, झीलें, तालाब, नदियाँ और सतह के नीचे ...
-
फलों का राजा आम है , महाराष्ट्र में हापूस और गुजरात में केसर आम .... लेकिन दुर्भाग्य से इस साल बेमौसम बारिश के कारण .......
-
हम महसूस करते हैं कि पृथ्वी ग्रह आजकल अपनी नाजुक अवस्था में है। बहुत सारी प्राकृतिक आपदाएँ और आपदाएँ हैं जो हमारे पर्य...
'Ek Ped Maa Ke Naam' campaign
Awareness towards environmental protection: Inspiring initiative of 'Ek Ped Maa Ke Naam' campaign In today's digital age, w...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें